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Saturday, 24 October 2020

अच्छा हुआ तुम हार गए . . ♥️♥️♥️

अच्छा हुआ तुम हार गए, जीतने पर लिखता तो लोग समझते कि आज ठुकठुकाने वाला खेल गया तो लोग उसके लिए लिख रहे हैं। पहली बार तुमको बेसहारा सा महसूस किया, वो तीन बार 2 लेने के बाद जिस तरीके से तुम हाँफ रहे थे मुझे लगा कि मेरी दुनिया रुक गई है, बगल में बैठा दोस्त बोला कि शेर सच में बूढ़ा हो गया है लेकिन उसकी अगली लाइन ये थी कि, हार फिर भी नहीं मानेगा। 
मैंने आखिरी के 4 ओवर तक किसी से कुछ नहीं कहा। 

क्या कहता? 

ये कि आखरी बॉल तक मुझे भरोसा है, जब तक माही क्रीज़ पर है। या ये कि, मुझे जीतता या हारता हुआ माही नहीं सिर्फ माही पसंद है।

आज पहली बार लगा कि क्यों तुम्हारी उम्र इतनी बढ़ गई? 
आज पहली बार महसूस हुआ कि माही अब सच में थक जाता है। विकेट के बीच दौड़ने में अब उसको दिक्कत हो रही है, वो पहले जितना फुर्तीला नहीं रहा शायद। 

हां, लेकिन इससे मोहब्बत कम नहीं होती है। जैसे तुम आखिरी तक लड़ते हो, हम आखिरी तक तुम्हारे साथ रहेंगे। 

जीत और हार तो इस मोहब्बत को कम और ज्यादा कर ही नहीं सकती। 
बगल में बैठा मित्र कह रहा था कि भले ही ठुक ठुका कर खेलें, लेकिन है तो भगवान ही! कैसे कोई नफरत कर सकता है इस इंसान से, ये हारता भी है तो शान से।

छोड़ो कोई बात नहीं, अगले मैच में ट्राई करना, फिट नहीं हो तो मत खेलना। मेरे लिए क्रिकेट की परिभाषा तुम ही हो। हारने पर इसीलिए लिख रहा हूँ ताकि ये एहसास बना रह सके कि हम बनावटी नहीं हैं।

छक्के मारने वाला माही सबको पसंद है, हांफ कर, हेलमेट खोल कर, अपने सांसों को ठीक करने वाला माही सिर्फ मुझे। 
जीत और हार से इतर, तुम बेहतर खेले, तुम जैसे खेलते हो वैसे खेलते रहना। 
ये टीवी, आईपीएल, टीम, लोग, क्रिकेट सब तुम्हारे कर्जदार रहेंगे। अंत में फिर से स्वाति मिश्रा की वो लाईन की, "हमने लंबे बालों वाले माही से लेकर सफेद दाढ़ी वाले एम एस को देखा है"
#msd ♥️♥️♥️♥️



Wednesday, 19 August 2020

Thank You Mahi ..

जानता था कि यह दिन कभी न कभी आना ही था। ऐसे अचानक आएगा, यह भी जानता था, लेकिन कहीं न कहीं दिल में एक उम्मीद थी कि शायद धोनी, एक बार सिर्फ़, धोनी वाला काम नहीं करेगा। उम्मीद थी कि शायद उसको एक आखिरी बार नीली जर्सी में और देख पाएँगे। पर भई धोनी है वो, वो है ही ऐसा। क्या कर जाए, कोई नहीं सोच सकता। 

अपने आप में अजूबा है, भला कौन खिलाड़ी बीच टेस्ट सीरीज़ में सन्यास ले लेता है, वो भी अपने अच्छे दौर में? कौन भला 199 मैच की कप्तानी को 200 किए बिना बीच में ही छोड़ देता है? कौन करता है भई ऐसा? कोई ऐसा खिलाड़ी नहीं देखा जो अपनी बेटी के पैदा होने के टाइम पर यह कह दे कि अभी "नेशनल ड्यूटी" पर हूँ, बाकी सब इंतज़ार कर सकता है। और कौन करता है ऐसे, 15 अगस्त को अपनी आज़ादी की घोषणा। 

जब छोटा था, तो सचिन उम्मीद हुआ करता था, जब सचिन ने क्रिकेट छोड़ा तो वो उम्मीद धोनी बन चुका था। सचिन से ज़्यादा प्यार धोनी से हो गया था। सचिन से ज़्यादा ओहदा धोनी का था मेरे लिए। उसकी तमाम वजहें रहीं, पर अनहोनी को होनी करने का विश्वास धोनी ने ही तो जगाया था।

मेरे पापा को कभी क्रिकेट में दिलचस्पी नहीं थी, पर जब धोनी आया, तो पापा ने अगर टाइम रहा तो, उसकी हर पारी देखी। मुझे याद है, वेस्ट इंडीज के दौरे पर 2006-07 के समय, मेरे पापा मुझे रात में 1-2 बजे उठाते और कहते देख धोनी खेल रहा है और हम साथ में उसकी बैटिंग देखते। उसकी बैटिंग, विकेट कीपिंग, कप्तानी, सब कितनी निराली थी न!

कभी कभी सोचता हूँ, कितना मुश्किल और आसान है, धोनी हो जाना - दोनों का एक साथ होना। कितना जटिल फिर भी सरल। दुख, गुस्सा, खुशी का इतना शानदार-मनमोहक बैलेंस। दिखना-दिखाना सिर्फ़ खेल में, उसके बाहर एकदम चुपचाप, गुमनाम ज़िन्दगी। लाइमलाइट से कोसों दूर, एक बेहतरीन इंसान। एक बेहतरीन दोस्त।

पर फिर भी बहुतों को खटकता रहा है धोनी, पहले यह बात बुरी लगती थी, पर अब लगता है कि हर अच्छे इंसान को सारे लोग अच्छा नहीं समझ सकते हैं। और इसलिए अब फ़र्क नहीं पड़ता है ऐसे लोगों से।

कितना कुछ है लिख देने को, कितना कुछ। इतना कि शायद मन ही न भरे। पर वक़्त का कुछ ऐसा तक़ाज़ा है कि रोकना है खुद को। आज ख़ुशी और ग़म दोनों के भाव हैं। खुशी उसको खेलता हुआ देखने की, ग़म उसको और न खेलते देख पाने का। इसके आखिरी मैच के बाद से एक मैच नहीं देखा है, और शायद अब देखना भी नहीं हो पाएगा। पहले सचिन था, फिर धोनी, और अब कोई नहीं है। एक टीस भी है, एक बार खुद सामने से खेलते न देख पाने की धोनी को।

#ThankYouMahi
#Answarable To None.