Monday, 1 February 2016

माँ

दिल में  प्यार  और  आँखों  में  ममता  छलकाती  हमारे  लिए

लबों पे दुआ और चेहरे पे मुस्कान हमेशा रखती हमारे लिए

न खुद की कोई चाह न करे परवाह वो फ़िक्र करे  हमारे लिए

हम फूलो की सेज पे कदम रखें वो काँटों पे चलती हमारे लिए

दुखों की चादर झाड़कर खुशियों का बिस्तर लगाये  हमारे लिए

ज़रूरत पड़े तो बन जाए दोस्त तो कभी गुरु बने हमारे लिए

कभी खुद ही बलैया ले कभी डर के नज़र भी उतारे हमारे लिए

आ जाए कोई मुश्किल वो दुआ करे और राह दिखलाए हमारे लिए

वो ''माँ'' ही है बस जो हर पल खुशियाँ मांगे बस हमारे लिए  ,

वो '' माँ '' ही है  जिसने  दिया सब कुछ,मैं क्या  मांगू  उसके लिए

ऐ  खुदा बस मेरी '' माँ'' को हर पल मेरे बस करीब ही रखना

ऐ  ''खुदा ''बस ''माँ ''की छाया में मुझे महफूज़ ही रखना

ऐ ''खुदा'' हर जनम मेरी ''माँ ''में ही मेरा वज़ूद ही रखना  .
                                                     

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